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मेरा मुस्कराना

Ipsita Bhadauria

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            है कौन किसके पास मे , आखें भिगाऊ मै ,
        
                                                    
                            
पागल हूं, खुली आंख में, सपने सजाऊ मैं।
दुख बांट के भी , दुख नही कम होगा है मालूम ,
यही कारण है कि , हर वक्त बस मुस्कुराऊ मैं।।
एक घंटा पहले
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Sanjai kumar

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