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मित्र बनकर धोए थे सुदामा के चरण,

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मित्र बनकर धोए थे सुदामा के चरण, भगवान कृष्ण जैसा मीत कहाँ पाओगे।
        
                                                    
                            
उनकी चरण रज का भी एक अंश नहीं, मन में ग्रहण किए गाल ही बजाओगे।
कथनी व करनी भी देखता है जग सारा, उसको तो वो ही देखना है जो छुपाओगे।
आज का सुदामा भी नहीं है दीन हीन बंधु, जो वो चाहता है उसको कहाँ से लाओगे।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
2 महीने पहले
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