संवेदनहीनता के भाव क्यों मन में भरे हैं हम।
मिटा आलोक क्या सारा बना डेरा लिया है तम।
दूसरों के दुखों को देखकर कैसे खुशी आती,
हृदय कैसा हुआ जिसको नहीं छूते खुशी व गम।।