कुल परिवार की प्रसन्नता के हेतु सब, मिलजुल कर के शिवालय को जाइए।
भोलेनाथ जी के नाग देवता की पूजा करि, मुँह माँगा वर आशुतोष जी से पाइए।
बिटिया बहिन सब ही का सतकार करि, कटहल की पकौड़ियों को बनवाइए।
गेहूँ व चने की घुघुरी को बनवा कर के, नाग पंचमी का पर्व प्रेम से मनाइए।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'