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कटि मटकाती छोरी

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रूप रंग की तिजोरी कटि मटकाती छोरी, उपवन बीच कुसुमान कौ लजाती है।
        
                                                    
                            
हम तुम से हौं बीस देखिकै निपोरौ खीस, कर से पकरि यही बात को बताती है।
फूलन कौ रंग फीका हुआ मोहिं देखि नीका, यही सोचि सोचि मन ही में इठलाती है।
चिड़िया चहकि रही करि करि बतकही, फूलन को देखि फूल सी वो मुसुकाती है।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक महीने पहले
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