विज्ञापन

कलयुगी दोहे

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झूठ बराबर तप नहीं साँच बराबर पाप।
        
                                                    
                            
कलयुग में ये चल रहा देखि लीजिए आप।।१॥

कलयुग में है झूठ अब, माइ बाप भगवान।
जिसने पूजा झूठ को पाया धन सम्मान।।२॥

कलयुग के इस राज्य में झूठा बनाता काम।
सच्चा भटकै रात दिन झूठे को आराम।।३॥

झूठों के दरबार में सत्य हुआ नीलाम।
उस पर यह अभियोग है, क्यों निकला बेदाम।४॥

मक्कारी से झूठ तक, जिसको पूरा ज्ञान।
राजनीति करता वही, जो तज दे निज मान।।५॥

कीरति बाढ़ी झूठ की, सच रोवै दिन रात।
झूठ कहे जग रीझता, सुनै न सच की बात।।६॥

सच को रखना याद नहिं, है इसकी पहचान।
झूठ कहो मत भूलिए, सदा राखियो ध्यान।।७॥

झूठ बिकै नहिं उस जगह, सच की जहाँ दुकान।
पर इसको पावै वही जिसको है पहचान।।८॥
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all