गुरु पग-पग पर जग में भरे पड़े हैं, हम पहचान लें तो जीवन सफल हो।
प्रकृति के सारे तत्व जो भी हैं विराजमान, चाहे सूर्य, चंद्र वारि नभ या अनल हो।
सूर्य चंद्र पालन समय का सिखाते हमें, करें न विलंब उर भावना अटल हो।
नीर तो तरलता शीतलता सिखाता हमें, पर मन अगन को धारे न विकल हो।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'