सावन की तिथि पंचम पक्ष सुधाकर का पसरी बदरी।
पर्व मनावन आइ गई मइके बिटिया बहिनी सिगरी।
डारन झूलन की छवि है सब गाइ रही मिलिकै कजरी।
हैं गुड़िया गुड़िया सब पीटत चाबत जाय रहे घुघुरी।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'