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गंगा माई

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दैत्य राज बलि का घमंड चूर करने को, आए श्री हरि निज रूप धरि वामन को।
        
                                                    
                            
तीन पग भूमि दान लेकर के चले जब, प्रथम में धरा दूजे नापा है गगन को।
तीजो पग ब्रह्म लोक में है पहुँचाया जब, ब्रह्मा उठि आए हरि चरण धुलन को।
वही धोया जल धरि लिया था कमंडल में, गंगा कहलाई तारा जग में सबन को।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक महीने पहले
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