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गाय चरावत मोहन

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गाय चरावत मोहन हैं वन में सँग ग्वाल सखा नित जावैं।
        
                                                    
                            
धेनु चली कबहूँ दुरि जायँ सबै मिलि कै उन हाँकति लावैं।
पेड़ कदंब चढ़ै सबके सँग डारन पै फिरि बेनु बजावैं।
माखन खाइ चलैं यमुना तट गोपिन के सँग रास रचावैं।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक महीने पहले
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