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धान खड़ा लहराय रहा

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हार हरा दिखलाय रहा यह दृष्टि जहाँ तक आपुहिं जावै।
        
                                                    
                            
धान खड़ा लहराय रहा कुछ बात कहै सुनि मूड़ु हलावै।
चूनरि ओढ़ि लियो वसुधा हरियारिपना बस रंगु दिखावै।
देखि छटा यहि भाँति कहै मन माह प्रभो बसि सावन आवै।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
3 घंटे पहले
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