आइ गईं बिटिया बहिनी घर आपुहिं मंगल मोद बढ़ावै।
प्रेम तरंग उठै सब में कजरी सुनिकै मन आनँद पावै।
डारन झूलन की छवि देखि लगै खुद पेड़ तरंग बढ़ावै।
बार हजार कहै मनुवा बस माह प्रभो यहु सावन आवै।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'