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भूलि गए भगवान

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भूलि गए भगवान जनौ नल खोलि दिए नहिं बंद कराए।
        
                                                    
                            
तेज हुवै कबहूँ कुछ धीम मुला जल धार गिरै मुँह बाए।
ताल भरे उफनाय रहे नदिया निज पेटु रही सोहराए।
इन्द्र तबौ समझैं कुछ ना बसि हैं अपनै सब रंग जमाए।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
2 घंटे पहले
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Sanjai kumar

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