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बंदर थे

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डारविन ने बताया हम कभी बंदर थे, लक्षण हैं आज भी मानो हमारी बात को।
        
                                                    
                            
कोई बुद्धिमान है तो कोई मूर्ख देख लीजै, काम सारे वैसे ही हैं दिन हो या रात को।
भरते कुलाँचे कहीं तो कहीं दिखाते दाँत, भूल नहीं पाए अब तक निज जात को।
कोई बड़ा वाला है तो कोई यहाँ छोटा वाला, कोई डाल डाल चूमे कोई पात पात को।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
11 घंटे पहले
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