गुनाह पर परदा डालने से गुनाह छुपता नहीं
उसके छींटे दिल की गहराइयो तक उतर जाते हैं
दिल तो हर जख्म सहने की कुव्वत रखता है
मगर वही छींटे ख्वाबो में भी डराने चले आते हैं