खत लिखने का सोचा कई बार
पर न था अपने पर एतबार
सच्चाई लिख पाउंगा क्या इस बार
या फिर हर्फ़ो में कर दूंगा हेराफेरी
कह दूंगा I am sorry
मगर इस दफ़ा दिल ने चुपके से कहा
झूठ से रिश्ते कहां बचते हैं भला
जो टूटा है उसे मान लेना बेहतर है
हर बात को अल्फ़ाज़ में तौलना जरूरी तो नहीं
अगर माफ़ी में सच की गर्माहट हो
अधूरी ज़ुबान भी काफी होती है
-रियो