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खत लिखने का सोचा

ij singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खत लिखने का सोचा कई बार
        
                                                    
                            
पर न था अपने पर एतबार
सच्चाई लिख पाउंगा क्या इस बार
या फिर हर्फ़ो में कर दूंगा हेराफेरी
कह दूंगा I am sorry

मगर इस दफ़ा दिल ने चुपके से कहा
झूठ से रिश्ते कहां बचते हैं भला
जो टूटा है उसे मान लेना बेहतर है
हर बात को अल्फ़ाज़ में तौलना जरूरी तो नहीं

अगर माफ़ी में सच की गर्माहट हो
अधूरी ज़ुबान भी काफी होती है
-रियो 
3 महीने पहले
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