गुल गुलशन गुलफाम हो गया
चर्चा ए आम हो गया
जिनको बनाया था बादशाह
वो चोरो का सरदार बन गया
गुलाब की खुशबू समझकर इत्र लगाया रोज़ का
हैरत तब हुई जब लेबल निकला अफरोज़ा का
गैरत बहुत थी हममें गिरे हुए सिक्के नहीं उठाते थे
मगर आज मुफलिसी ने गिरहकट बना दिया
जमाने का गुनहगार हूँ यही बताया गया है मुझसे
गुनाह क्या है मेरा ये छुपाया गया है मुझसे
रंजिशे रखते हैं वो लोग भी हमसे
जिनका ख्वाबो में भी दिल नहीं दुखाया गया हमसे