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फितरत तुम्हारी

ij singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फितरत तुम्हारी कमाल कर गई
        
                                                    
                            
मुरझाए हुए फूलों में भी रूह फूँक गई
दरख़्तो पर फिर हरियाली छा गई
दरिया का पानी भी मीठा हो गया

बहती बयार कोई पैगाम कह गई
हयात में फिर गुल खिल गए
रुठे हुए दो दिल मिल गए
तेरी मौजूदगी से मौसम बदल गए
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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