फितरत तुम्हारी कमाल कर गई
मुरझाए हुए फूलों में भी रूह फूँक गई
दरख़्तो पर फिर हरियाली छा गई
दरिया का पानी भी मीठा हो गया
बहती बयार कोई पैगाम कह गई
हयात में फिर गुल खिल गए
रुठे हुए दो दिल मिल गए
तेरी मौजूदगी से मौसम बदल गए