विज्ञापन

ख़ुद मुख़्तार

Hridya Khatri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रिश्तों की भीख माँगना मेरी फ़ितरत नहीं,
        
                                                    
                            
ख़ुद-मुख़्तार हूँ मैं, ये दस्तूर मुझे मंज़ूर नहीं।

जिन्हें मिलना है मिलें मेरी हक़ीक़त से आकर,
किसी के पैमाने पे बदलना मुझे मंज़ूर नहीं।

तुम्हारे नख़रे, तुम्हारी शर्तें, तुम्हारे ये क़ायदे,
अपनी ज़ात का शाह हूँ, ये ग़ुलामी मंज़ूर नहीं।

तुम्हें वहम है कि तेरे बिना मर जाऊँगा मैं,
तेरी इस ग़लतफ़हमी को पालना मुझे मंज़ूर नहीं।

बड़ी मुद्दत से सँभाला है इस अकेलेपन को मैंने,
किसी के झूठे दिलासे पे पिघलना मुझे मंज़ूर नहीं।

बिखर जाऊँगा मगर हर दर पे झुक नहीं सकता,
मेरी इज़्ज़त-ए-नफ़्स को कोई सौदा मंज़ूर नहीं।

जो दूर जाना चाहें, उन्हें रस्ता मिले खुला,
मेरी इस महफ़िल में कोई शर्त-ए-हाज़िरी मंज़ूर नहीं।

'हृदय' वो दरिया है जो अपनी राह ख़ुद बनाता है,
किसी के सहारे बहना मेरी ख़ुदी को मंज़ूर नहीं।

मैं ख़ुद चला जाऊँगा जब मेरी हद ख़त्म होगी,
किसी के साए में रहना मेरी अना को मंज़ूर नहीं।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all