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फूलों का कारोबार !

Himanshu kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो फूलों का
        
                                                    
                            
कारोबार करते हैं,
आँखों की भाषा को,
शब्दों में बेशुमार करते हैं ....

नफ़रतों के बाज़ार में अब,
हर तरफ़ ख़ामोशियाँ हैं वीरानियों की...
चलो लफ़्ज़ों की ज़ुबाँ से हम,
मोहब्बत की दुकान खोलते हैं....

इस जहान में लोग हैं,
बहुत परेसां......
किसी का हाथ थामते है,
किसी को हमराह कहते हैं,

चलो इनकी बेरंग सी,
दुनिया को भी....
फूलों के रंगों सा,
गुलजार करते हैं !

~हिमांशु भारद्वाज 'आनंद'
एक महीने पहले
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