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भरोसा जब टूटा

Himanshi Gola

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भरोसा किया था कभी किसी पर
        
                                                    
                            
पर वो भरोसे लायक नहीं निकला,
साथ बिताया था जो समय उसके साथ
शायद वो उसके लायक नहीं निकला,
ऐसी क्या मजबूरी थी कि
एक दिन मिलकर
अगले दिन ही भूल गया|
अब तू पहचानता नहीं या जानता नहीं,
वो याद नहीं या अब कोई और ख्वाब नहीं,
तू ऐसा था या मेरे को देखकर बदल गया?
गलती बता देता, बुरा मान जाता,
लड़ाई कर लेता, या रूठ जाता,
पर तू तो भूल गया|
अब मैं वापस आना नहीं चाहती,
तुझे अपनी याद दिलाना नहीं चाहती,
मैं खो गई उस बंद कमरे में,
जहाँ मैं अकेली थी,
और अब तेरी याद आकर भी मैं याद करना नहीं चाहती|
तू है कौन?
शायद दिल रोता है,
आँख भी नम होती है.....
पर ये वापस तेरे पास जाने का ख्याल अब मुझे डराता है,
कही वापस मैं रोने न लगूं, तेरी याद में खोने न लगूं,
भूल जाऊं तो अच्छा है
बस तुझे देखकर ये दिल आज तक भी रोता है|
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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