सिर्फ तुम
वो सुनहरी धूप के साथ
खिलखिलाता हुआ तेरा चेहरा,
बारिशों में ठहरे पानी-सा
तेरा पहरा।
लंबे बाल, काली आँखें,
वो शर्मा कर मुझसे
कुछ ऐसे बोले—
रातें भी, शामें भी,
मेरी हर सुबह भी तुमसे।
हो अगर मिलना मुझसे,
ज़रूरी नहीं
के सावन बरसे।
शिकायतें करो, वादे करो,
बस करना न बेवफ़ाई,
मैं तुमसे और तुम मुझसे—
बस कभी न आए ये जुदाई।
बिखर जाऊँ कभी तो
समेट लेना मुझे तू खुद में,
कहने लगे दुनिया ग़लत
तो छोड़ न देना मुझे।
दुनिया को कर के दूर,
तुझे रख लूंगा अपनी पलकों में,
दे देना साथ मेरा तू
ज़िंदगी के इम्तिहानों में।
रंग भर दूँगा मैं
तेरी ज़िंदगी की
ख़ाली किताबों में।
-हिमानी त्यागी