विज्ञापन

और उसका मिलना पूरी कायनात से बढ़कर हो जाता है।

Hemsingh Rawat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ओह! आख़िर तेरे आने का ख़याल भी क्या ग़ज़ब था,
        
                                                    
                            
तेरी एक झलक की ख़ातिर दिल भी कितनो से अलग था

तेरे इंतज़ार में कितनी शामें ख़ामोश गुज़ार दीं,
कितनी ही रातें तेरे ख़यालों मे सवार दी
हर आहट में तेरे क़दमों की आहट तलाशता रहा,
हर गुज़रते लम्हे में तेरे आने की उम्मीद सँजोता रहा।

तेरे आने की ख़ुशी कुछ इस क़दर रूह में उतरी
कि तेरे आने से पहले ही मेरी धडकने सँवरी

लबों पर मुस्कान थी, आँखों में अनगिनत ख़्वाब,
और दिल में बस एक आरज़ू थी—तू आए, तो ठहर जाए वक़्त।

मगर जब तू आया, तो अजीब-सा मंजर हुआ,
साँसें ठिठक गईं, दिल की धड़कनों पर जैसे पहरा हुआ।
आँखें नम थीं, मगर उनमें कोई शिकायत नहीं थी,
लब ख़ामोश थे, मगर मोहब्बत की कोई कमी नहीं थी।

जिन अल्फ़ाज़ को तेरे इंतज़ार में सहेजकर रखा था,
तेरे सामने आते ही न जाने कहाँ खो गए।
जिस मुलाक़ात के लिए न जाने कितने ख़्वाब बुने थे,
उसकी पहली नज़र में ही हम ख़ुद को भूल गए।

बस जी चाहता था, तेरे पहलू में बैठकर
कुछ वक़्त इस तरह गुज़ार दूँ,
कि न सुबह की फ़िक्र हो, न शाम का कोई तक़ाज़ा,
न दुनिया की कोई आवाज़ हो, न वक़्त का कोई लिहाज़ा।

तेरी क़ुर्बत में कुछ पल यूँ ठहर जाऊँ,
कि मेरी साँसें भी हवाओं के नाम हो जाएँ,
मेरी धड़कनें तेरी धड़कनों की हमनवा बन जाएँ,
और मेरी रूह को तेरे होने भर से सुकून मिल जाए।

सच कहूँ, तेरे आने से पहले मैं तेरा इंतज़ार जीता रहा,
और तेरे आने के बाद उस एक लम्हे में पूरी उम्र जी गया।
शायद मोहब्बत इसी एहसास का नाम है,
जहाँ किसी की प्रतीक्षा भी इबादत बन जाती है,
और उसका मिलना पूरी कायनात से बढ़कर हो जाता है।
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prem Chandra

2 कविताएं

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile