हमें याद करते करते, न बिताओ रैन सारी।।
तुम दे चूकी क्यों हमको, नींदे सभी तुम्हारी।
मन क्यूँ चला बतलाओ, प्रीतम की ठग डगर में।
उसे रोक लो भी वरना, रोओगे इस सफर में।।
संभलो कि यह सफर फिर, बन जाये ना खुमारी।।
तुम दे चूकी क्यों हमको, नींदे सभी तुम्हारी।।
हमें याद करते करते, न बिताओ रैन सारी........
इस अगन में तुम विरह की, खुद को ना यूँ जला लोे।
जो झुलस चुके हैं उनको, कर याद मन संभालो।।
बनकर भी तुम किन्हीं की, बन भी रहो तुम्हारी।
तुम दे चूकी क्यों हमको, नींदे सभी तुम्हारी।।
हमें याद करते करते, न बिताओ रैन सारी.......