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बाँट लूँ उसकी ख़ामोशी

HEMANT KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाहा तो बहुत
        
                                                    
                            
पूंछ लूँ उसके,
आँसुओं का सबब।

गले लगाकर ,
सुनूँ भीतर का शोर।
या कंधे पर सिर रख,
बाँट लूँ उसकी ख़ामोशी।

पर.....

कुछ दर्द ऐसे होते हैं,
जिन्हें छूने की चाह में भी
हम छू नहीं पाते।

– हेमंत
एक घंटा पहले
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