पत्ते झरते हैं जब शाख से
एक पीड़ सी उठती होगी उसे
कितनी उम्र गुजारी होगी
उस शाख और पत्ते ने
वृक्ष की छाया में रहकर
सहसा यूं विरह की व्यथा
एक हूक तो उठती होगी
उस विरह की वेदना में
वह वेदना कम हो पाती होगी
किसी नव पल्लव के आगमन से