याद हर बात मुझे मुँह ज़ुबानी अब तक।
इश्क़ रहा दे कैसी ये निशानी अब तक।।
कहता है मोहब्बत है तुझसे 'हीरा',
फिर भी बात न कोई है मानी अब तक।।
मुझसे ज़्यादा करता है औरों पे करम,
न कही मुझपे कोई भी कहानी अब तक।।
दे डाली किसी को मुफ़्त में गीत औ' ग़ज़लें,
नहीं आयी मेरे गीतों में रवानी अब तक।।
कहनी पड़ती हर बार उसे एक ही बात,
न हुई उसको मोहब्बत यानी अब तक।।
ये घाव मुझे मेरी जां ने ही दिए हैं,
हो रही है मुझको भी हैरानी अब तक।।
नाज़ुक दिल मेरा होता रोज़ परेशां,
'हीरा' दूर हुई न परेशानी अब तक।।
-हीरा जोशी