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नव-जीवन की वर्षा

Harshvardhan Rai

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब आ बरसे हैं मेघ यहाँ,
        
                                                    
                            
और धरती हुई जलमग्न यहाँ।

धरती जल बिन थी कराह रही,
जो जल बरसा तो शांत हुई।
और तृप्त प्रकृति नितांत हुई

थीं सूखी सारी नदियाँ भी,
अब जल है उनके अंदर भी।
कबसे ये भी तो कराह रहीं,
मेघों को प्रतिदिन पुकार रहीं।

ओ मेघराज अब आ जाओ,
जल की वर्षा अब कर जाओ।
अब जल को यहाँ तुम बरसाओ,
मेरी भी प्यास बुझा जाओ।

जब इंद्रराज ने यह देख लिया,
तब मेघराज को आदेश दिया।
इतना मत तुम इतराओ,
जा धरती पर जल बरसाओ।

अब आ बरसे हैं मेघ यहाँ,
और धरती हुई जलमग्न यहाँ।
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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