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नाटकबाजी

Harikesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहली नजर में ही उलझकर रह गया था मैं
        
                                                    
                            
आंखों में तेरी डूबकर बह गया था मैं

था मैं तेरी अदाओं का अनुरागी
प्यार को मेरे कह बैठी तुम नाटकबाजी

अब इश्क़ है तू किसी और का
लड़का है शायद किसी मौर्य का

जब जब तेरे बदन को अपने बदन से सटाया
तब तब तूने मेरे प्यार को नाटक बताया

मुझको नाटकबाज कहकर के तू खुद ही नाटकबाजी करती थी
रात के अंधेरे में बुला बुलाकर उसको तू फाटकबाजी करती थी

हरिकेश यादव काशी
हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी शिवपाल अम्बेडकर नगर

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6 वर्ष पहले
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