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यह अगस्त मतवाला है

Hans Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तोड़ गुलामी
        
                                                    
                            
के बंधन को
स्वर्णिम याद
दिलाने वाला
यह अगस्त
कितना मतवाला ? खून गरम था
वीरों का
बाँध न पाई
ये जंजीरे
चढ़ गए
फांसी के फंदे
यह अगस्त
है हिम्मत वाला।
बह चली तोप
लज्जित हथगोले
पिघल गई
बंदूकें सब
यह उत्साह
निराला है
यह अगस्त
मतवाला है ।
निद्रा से हमें
जगाने वाला
नव प्रकाश
को लाने वाला
मुर्दों की भी
बाँह फड़कती
नए जोश
को लाने
वाला
नहीं झुकेगा
मेरा तिरंगा
ललकारेंगे
लाल किले
से देश
देखने वाला है
यह अगस्त
मतवाला है ।
मंगल पांडे
वीर कुंवर सिंह
रानी झांसी
बेगम हजरत
अशफाक उल्लाह
अमर रहे
इनकी कुर्बानी
आजादी की
अमर निशानी
आओ
प्रण हम लेते
हैं अक्षुण्ण
हो मेरी आजादी
देश न झुकने
वाला है
यह अगस्त
मतवाला है ।।
 
2 महीने पहले
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