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हाय री दुनिया

रजनीश स्वच्छन्द

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हाय रे दुनिया।।
        
                                                    
                            

बड़ी कमबख्त दुनिया है।
बड़ी बदबख्त दुनिया है।

न पिघले आँख के बादल,
बड़ी ही सख्त दुनिया है।

सुनेगी दर्द क्या तेरा,
यहाँ तो व्यस्त दुनिया है।

चीखों पर भी है हँसती,
बड़ी ही मस्त दुनिया है।

सुबह भी छुप कहीं सोयी,
यहाँ तो अस्त दुनिया है।

सभी शापित सभी दानव,
यहाँ अभिशप्त दुनिया है।

खुशी सच्ची कहाँ भाई,
जलन से तप्त दुनिया है।

न सिहरन बस रही तेरी,
यहाँ तो त्रस्त दुनिया है।

कफ़न कह लो चिता बोलो,
धरे सब हस्त दुनिया है।

न लिख रजनीश तू कुछ भी,
सभी से पस्त दुनिया है।

©रजनीश "स्वच्छंद"


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