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वक़्त से बढ़कर यहाँ कोई नहीं है।

Gyaneshwar Anand

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक़्त का दरिया कभी ठहरा नहीं है,
        
                                                    
                            
ज़िंदगी का सिलसिला ठहरा नहीं है।

जो भी आया है यहाँ, जाना उसे है,
इस जहाँ में कुछ सदा ठहरा नहीं है।

धूप में तपकर निखरना सीखिए अब,
वक़्त से बढ़कर कोई सहारा नहीं है।

आँधियों से लड़ के जो आगे बढ़े हैं,
उनके दिल में अब कोई डर ठहरा नहीं है।

वक़्त ने हर ज़ख़्म का मरहम दिया है,
दर्द का कोई निशाँ गहरा नहीं है।

कल तलक जो साथ थे, बिछड़े अचानक,
वक़्त के आगे कोई रिश्ता नहीं है।

आज जो मंज़िल बहुत मुश्किल लगे है,
हौसलों से बढ़कर कोई रस्ता नहीं है।

वक़्त की रफ़्तार को पहचान ‘ज्ञानेश’,
वक़्त जैसा दूसरा मौका नहीं है।
मक़ता
‘ज्ञानेश’ अपने हौसलों को कम न करना,
वक़्त से बढ़कर यहाँ कोई नहीं है।

 
2 महीने पहले
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