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नदी की विजय

GURU SHARAN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नदी पहाड़ों से उतर रही है,
        
                                                    
                            
इसलिए शोर कर रही है।
मैदानों में आ कर वही-
नदी चोर बन रही है।
अपने मन की बात,
तुम्हें खुद से कहना होगा।
झरना बन कर कहीं-
तो कहीं मूक रहकर,
तुम्हें हर हाल में बहना होगा।
दूर-दूर से आकर-
उसका दुनिया तमाशा देखेगी,
वह सूर्य का ताप भी झेलेगी
और दुनिया उसमें ठंडक खोजेगी।
लोगों का पाप भी वही धुलेगी क्यूँकि,
निर्मलता भी उस में ही होगी।
ताकत और संबल देकर वह,
खुद ही कहीं एक दिन-
अनजाने में संकट और विपत्ति बनेगी।
3 वर्ष पहले
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