नटखट ज़िंदगी तू और तेरा सताना!
अगर तू कहीं~
कान्हा के जैसे ग़मों के माखन चुराती,
मोहन की भांति शांति से मन मोह लेती,
माधव के समान कष्टों को हर लेती,
कृष्ण की तरह हर युद्ध में साथ देती,
तो मैं तुझसे भी ज़्यादा नटखट होती!