हवा और पानी दोनों में मिलावट है।
बात और बानी दोनो में मिलावट है।
कहते कुछ और करते कुछ और।
जान और जानी दोनो में मिलावट है।
शुद्धता कहीं नजर क्यों नहीं आती।
तेल और घानी दोनों में मिलावट है।
बंदा क्यों चल दिया शहर की ओर।
गांव और ढाणी दोनों में मिलावट है।
सिर्फ नाती पोते की ही चाहत है।
दादी और नानी दोनो में मिलावट है।
शराफत से दुकान कभी नहीं चलती।
लाभ और हानि दोनो में मिलावट है।
जनता की कही सुनी नहीं जाती तो।
राजा और रानी दोनो में मिलावट है।
सोहल कहां कहां कैसे साफ करेगा।
धानी और धानी दोनो में मिलावट है।
-गुरदीप सिंह सोहल