आदत से मजबूर है कुछ लोग, जो दूसरों में ऐब ढूंढते है।
दुख बस इतना है कि वो मेरे गम में अपनी खुशी ढूंढते है।
मेरी बस इतनी इल्तजा है कि अपने कर्मों को धर्म से आँका करो।
ऐब ढूंढना है तो बस आईना देखो, दूरबीन में मत झांका करो।