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श्रीगणेश विसर्जन

Govardhan Bisen

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बाप्पा आए धाम में, हरषे सब नर-नारि।
        
                                                    
                            
दस दिन मंगलमय रहे, सुख बरसे अविकारि॥
सुख बरसे अविकारि, आरती भजन सुहाए।
दुख-हर्ता सुख-कंद, मोद उर माहिं समाए॥
कह 'गोकुल' कविराय, विघ्न सब मेट पराए।
काटे भव के क्लेश, धन्य प्रभु बाप्पा आए॥

लोचन सभी अश्रु भरे, विदा होत भगवान।
अनंत चौदस आ गई, नम मन सकल जहान॥
नम मन सकल जहान, अबीर-गुलाल उड़ाते।
देत बिदाई लोक, नयन जल-धार बहाते॥
कह 'गोकुल' कविराय, हरहु प्रभु संकट-मोचन।
अगले बरस पधार, सजल भए सब ही लोचन॥२॥

गणपति प्रतिमा जल घुली, नश्वर जगत दिखाय॥
माटी का तन यह बना, माटी में मिल जाय।
माटी में मिल जाय, मोह ममता सब त्यागो।
सत्य-रूप पहचान, सुमति-पथ ऊपर जागो॥
कह 'गोकुल' कविराय, कर्म ही जग का टीका।
पावन निर्मल रूप, जानलो यह माटी का॥३॥


 
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