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केशव हितकारी

Govardhan Bisen

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राधा के रसिया, मन में बसिया, प्रभु मोहन गिरधारी।
        
                                                    
                            
मै नमाऊँ माथ, हटावो नाथ, आये संकट भारी ॥
संकट का मारा, मिले सहारा, आया मै बलिहारी।
प्रभु करो दूर दुख, रहे सदा सुख, सुनिए विनय हमारी ॥१॥

माखन के चोरा, नन्द-किशोरा, वंदूँ छवि मदन-मुरारी।
गौवन के राखे, माखन चाखे, लखि जन जन बलिहारी॥
बकासुर सँहारा, कष्ट निवारा, ध्यावत ब्रज नर-नारी।
विपदा को टाले, भक्त संभाले, कष्ट हरे गिरधारी ॥२॥

कंसहि तुम मारा, जगत उबारा, जन के भाग्य-सितारे।
पांचाली लाजा, राखी राजा, आकर कष्ट सँवारे॥
पतितों के पावन, अति मनभावन, हर लो दुख अतिभारे।
भक्तों के दाता, भाग्य विधाता, नैया आप उबारे ॥३॥

यशुमति के लाला, प्रभु गोपाला, आया द्वार तुम्हारे ।
सदा आप में लिन, जपूँ रात दिन, कीजै काज हमारे ॥
नैया यह हमार, फँसी मझधार, निकालो प्रभु किनारे।
केशव हितकारी, कृष्ण मुरारी, जीवन आप सँवारे ॥४॥

मुरली की ताना, मगन जमाना, नाचें सब नर-नारी।
भूलूँ मैं जग को, पाऊँ मग को, जाऊँ तुम पर वारी ॥
'गोकुल' हितकारी, कृष्ण मुरारी, सबके तुम रखवारी।
हाथ जोड़ स्वामी, अंतर्यामी, वंदूँ छवि तिहारी ॥५॥
-गोवर्धन बिसेन 'गोकुल'
 
एक महीने पहले
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