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गुरु-वंदना (कुंडलिया छंद)

Govardhan Bisen

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                            पहले गुरु माता-पिता, देते जीवन-ज्ञान।
        
                                                    
                            
जीवन में मेरे लिए, दोनो हैं भगवान॥
दोनो हैं भगवान, राह वे मुझे दिखाते।
दे विद्या-संस्कार, ज्ञान की ज्योति जगाते॥
कह 'गोकुल' कविराय, सीख उनकी मन धरले।
मात-पिता आधार, तभी पायेंगे पहले॥१॥

गुरुवर मम श्रीराम ने, दीन्हो दिव्य विधान।
बत्तीस सौ ग्रन्थ लिखे, मिटा सकल अज्ञान॥
मिटा सकल अज्ञान, देव मनुज में जगाया।
धरती पर ही स्वर्ग, सुभग साकार बनाया॥
कह 'गोकुल' कविराय, ज्ञान दीप जले घर-घर।
जगत कल्याण हेतु, यहाँ प्रकटे है गुरुवर॥२॥

शिक्षक दिवस मनाइएँ, तजि दीजै अभिमान।
ज्ञान दीप जग में जले, मिटे तिमिर अज्ञान॥
मिटे तिमिर अज्ञान, नमों राधाकृष्णन को।
शीश झुकाकर आज, वंदिए शिक्षक-जन को॥
कह 'गोकुल' कविराय, गुरु ही हमारे रक्षक।
कर ज्ञान का उपयोग, आप भी बनिए शिक्षक॥३॥
-गोवर्धन बिसेन 'गोकुल'
 
एक महीने पहले
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