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दरबार-ए-सब्जी

Girija Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगा जब दरबार सब्जी का, कही सबने अपनी कहानी।
        
                                                    
                            
बैंगन बोला मैं महाराजा हूँ; भिन्डी बोली मैं हूँ महारानी।।
नेनुआ, झिमनी, सेम, कद्दू बोले हम सब हैं भले दरबारी।
मूली बोला मैं महामंत्री भोजन में मेरी नहीं है कोई सानी।।
ओल बजाबे ढोल जोर से सब साग मिलि मिलावै ताल।
गोभी बोली मैं गणिका हूँ तब परवल बोली मैं हूँ पटरानी।।
आलू बोला मैं सबका रखवाला, सूरत मेरी जानी-पहचानी।
प्याज व मिर्ची संग बोले हम हैं सबकी आँखों का पानी।।
एक घंटा पहले
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