विज्ञापन

शुक्रिया कलम

Gauri Chaudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐ कलम तेरा शुक्रिया ,ऐ कलम तेरा शुक्रिया
        
                                                    
                            
मेरे हर दर्द को अपना बना लेने का शुक्रिया
तू जो साथ नहीं देती ,तो मर जाते हम
हर पल साथ निभा देने का शुक्रिया

मैं जो हंसती, हंस देती तू साथ मेरे
रो अगर मैं दू , रो देती तू साथ मेरे
जब जब गिरते आंसू मेरे,
हर आंसू पी लेने का शुक्रिया

गिरी जब मैं ठोकर खाकर हाथ बढ़ाया तूने
ज़ख्मो पे स्याही का मरहम लगाया तूने
खींच कर सीने से मेरे हर दुख को,
पन्ने पर सजा देने का शुक्रिया

कविता गुर्जर


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile