ऐ कलम तेरा शुक्रिया ,ऐ कलम तेरा शुक्रिया
मेरे हर दर्द को अपना बना लेने का शुक्रिया
तू जो साथ नहीं देती ,तो मर जाते हम
हर पल साथ निभा देने का शुक्रिया
मैं जो हंसती, हंस देती तू साथ मेरे
रो अगर मैं दू , रो देती तू साथ मेरे
जब जब गिरते आंसू मेरे,
हर आंसू पी लेने का शुक्रिया
गिरी जब मैं ठोकर खाकर हाथ बढ़ाया तूने
ज़ख्मो पे स्याही का मरहम लगाया तूने
खींच कर सीने से मेरे हर दुख को,
पन्ने पर सजा देने का शुक्रिया
कविता गुर्जर
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