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लफ्जों में

Gauri Agarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लफ्जों में यूं कह न सके
        
                                                    
                            
जो कुछ तुम भी बया करो
पता ना चले मुझे
मुझ में कुछ इस तरह मिला करो..

इतना ना झुको की झुकने की
आदत हो जाए
कुछ सर अपना भी
उठा के रहा करो ....

माना दिल की बातों के तमाशे बन जाते हैं
पर अपना दिल समझ के कुछ हमें भी कहा करो...

मौत तो आएगी सनम
तुझे भी और मुझे भी
छोड़ो गम को हमनवा
कुछ मौज में रहा करो ..

तेरे रूह में समाए है
जुदा तो होंगे ना हम
रूह में मिलाकर रूह मेरी
रूह में बहा करो ...

आंखों की रोशनी दिल का
ठंडा सा सुकून हो तुम
आओ मिलो हमसे कभी
हाल भी पूछा करो..

देखता हूं तुझे तो लगता है
खुदा है तू मेरा
ए खुदा तू मेरे खुदा की
तरह ना दिखा करो...
ना दिखा करो ..

पता ना चले मुझे, मुझ में कुछ इस तरह मिला करो
2 वर्ष पहले
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