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ऐसी क्या मोहब्बत

Gauri Agarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसी क्या मोहब्बत की नादानी चली गई
        
                                                    
                            
हम बेईमान भी रहे और बेईमानी चली गई ...

वक्त बड़ा सख्त है सुनता ही नहीं है
अब तो ख्वाबों से भी परियों की कहानी चली गई ....

वह लोग जो हमारी मासूमियत के कायल थे
खो गए हम और उनकी निशानी चली गई ...

रह गए हम रोते सिकुड़ते कुछ जिंदगी में
ना रहा कुछ नया यादें पुरानी चली गई ....

तू आया तो उम्मीद का एक झरोखा भी आया
जो तू गया तो यादें सुहानी चली गई ...

कुछ अजीब सी कशमकश है की बचपन
चला गया धीरे-धीरे यूं ही जवानी चली गई...

ऐसी क्या मोहब्बत की नादानी चली गई
हम बेईमान भी रहे
हम बेईमान भी रहे और बेईमानी चली गई....
2 वर्ष पहले
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