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गजल

Gauri Agarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहले नहीं थी अब मजबूर हो रही है ...
        
                                                    
                            
जिंदगी से जिंदगी कुछ दूर हो रही है...

बेपरवाह सी थी यह उम्र ही लापरवाह ...
अब संभली है शायद कुछ जरूर हो रही है ...

जिंदगी से जिंदगी कुछ दूर हो रही है

ना मिले मन तो चल कदम ही मिल लेते हैं ...
दो तेरे दो मेरे कुछ ख्वाब सजा लेते हैं....

तू रह ले खुश हम रहे गम जदा ....
धीरे-धीरे ही सही है उदासियां मंजूर हो रही है ....

पहले नहीं थी अब मजबूर हो रही है ....
जिंदगी से जिंदगी कुछ दूर हो रही है.....

लेना देना ही बस सीखा रही है जिंदगी ...
खोने को बहुत कुछ है बतला रही है जिंदगी...

कुछ अल्फाज पिरोए हैं मैंने भी तेरे लिए ......
जो गजलें संभाल के रखी थी वह चूर हो रही है ....

पहले नहीं थी अब मजबूर हो रही है ....
जिंदगी से जिंदगी कुछ दूर हो रही है ....

कभी तो शुक्रिया करा करो हमारा भी ....
संग हमारे आसमा पर है नाम तुम्हारा भी....

तुम्हें बचा के रखा है हमने बड़े जतन से...
और आसमान में गलतियां मेरी मशहूर हो रही है ....

जिंदगी से जिंदगी कुछ दूर हो रही है ...
पहले नहीं थी अब मजबूर हो रही है....
2 वर्ष पहले
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