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मिट्टी की पहचान

Gaurav Chhatrapati

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अंबेडकर नगर की पावन धरती पर,
        
                                                    
                            
जहाँ सपनों को उड़ान मिलती है,
वहीं एक छोटे से गाँव सिलावट की मिट्टी में,
एक नई कहानी हर दिन खिलती है।

महरुआ पोस्ट जिसकी पहचान है,
सादगी जिसका सम्मान है।
उसी धरती का एक बेटा,
गौरव पाल छत्रपति उसका नाम है।

न ऊँचे महलों में जन्म लिया,
न दौलत की छाँव मिली।
मिट्टी की खुशबू, खेतों की हरियाली,
और अपनों की दुआएँ ही उसकी पूँजी बनी।

धूप ने उसे तपना सिखाया,
बारिश ने आगे बढ़ना सिखाया।
संघर्षों की राहों पर चलकर,
उसने कभी हार मानना नहीं सीखा।

गाँव की गलियों से निकला वह सपना,
आज आसमान को छूना चाहता है।
अपने नाम से पहले अपने कर्मों की पहचान,
दुनिया को देना चाहता है।

सिलावट की मिट्टी उसे पुकारती है,
"बेटा, जहाँ भी जाना, अपनी जड़ों को कभी मत भूलना।"

अंबेडकर नगर की हवाएँ कहती हैं
"मेहनत करने वाला कभी छोटा नहीं होता।
जो अपने गाँव का नाम रोशन करे,
उससे बड़ा कोई बेटा नहीं होता।"

गौरव का विश्वास यही है-मंज़िल दूर हो सकती है,
लेकिन असंभव नहीं।
रास्ते कठिन हो सकते हैं,
लेकिन हौसले कमज़ोर नहीं।

वह चाहता है कि
एक दिन जब लोग उसका नाम लें,
तो साथ में उसके गाँव सिलावट,
पोस्ट महरुआ, और अंबेडकर नगर का नाम भी गर्व से लें।

उसका सपना केवल अपनी सफलता नहीं,
बल्कि अपने गाँव के हर बच्चे की मुस्कान है।
वह चाहता है कि हर युवा कहे -
"हम भी अपनी मेहनत से इतिहास लिख सकते हैं।"

एक दिन ऐसा आएगा,
जब उसकी कलम लोगों के दिलों को छुएगी,
उसकी पहचान उसके कर्मों से होगी,
और उसकी सफलता उसकी मिट्टी को समर्पित होगी।

गौरव पाल छत्रपति की यही कहानी है—
संघर्ष उसका साथी है,
मेहनत उसकी ताकत है,
और अपने गाँव की मिट्टी उसका अभिमान है।

जो अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है,
उसे दुनिया की कोई आँधी गिरा नहीं सकती।
सपने उसी के सच होते हैं,
जो अपनी मिट्टी का सम्मान करना नहीं भूलता।

अंबेडकर नगर की धरती गवाह रहेगी,
महरुआ का नाम चमकता रहेगा।
सिलावट गाँव का यह बेटा,
एक दिन अपनी मेहनत से इतिहास लिखेगा।

 
2 महीने पहले
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