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मिट्टी ही बन जाना है हमें

Ganesh Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिट्टी ही तो हैं हम
        
                                                    
                            
तभी तो मिट्टी बन जाते हैं
कभी जल कर, कभी दफ़न होकर

यही है कुदरत से, रिश्ता हमारा
पत्थर और पेड़ से अलग नहीं हैं हम
सब एक ही डोर से तो बंधे हैं

फिर क्यों भाग रहे हैं हम, मिट्टी से दूर
जबकि मिट्टी ही बन जाना है हमें
कभी जल कर
कभी दफ़न होकर
2 महीने पहले
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