विज्ञापन

शब भर देखा ख्वाब सुहाना

Furkan Rahi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब भर देखा ख्वाब सुहाना
        
                                                    
                            
सहर हुई तो था मैं बेगाना

नींद खुली तो खुली हकीकत
क्या होता है ख्वाब सुहाना

.शब भर तारे गिनते रहे हम
नींद आई ना ख्वाब सुहाना_
 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all