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कदम रुक गए ऐसी जगह,जहाँ किनारा है खुद लपाता

Elsa Anna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कदम रुक गए ऐसी जगह,जहाँ किनारा है खुद लपाता
        
                                                    
                            
कारी रात से भी गहरा अंधेरा फैला है,मानो उसने सब अंदर रम लिया है।
भूरी आँखें पता-काम भूल गयी हैं,मालिका का अस्तित्व ही भूल रही हैं।
नंगे कोमल पैरों के आस-पास फैला talaab hai ,अंधेर उसमें सर उठाकर बैठा है।
झांकते ही नजरे रास्ता बदल लेती हैं,गहराई उनमें जाने क्या छुपा बैठii है
अंदरशांत अंधेरे में छुपा एक काल है,पसरी भारी हवा हर पल घुट उसका गला है।
2 दिन पहले
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