कुछ दर्द शब्दों से बयां नहीं होते ,
सिसकियों से निकली हुई आहटें
दूर तक नहीं जाती,
घुट घुट कर जी लेते हैं मरहूम अपनी मिल्कियतों में,
बंद कमरों में कभी बहार नहीं होती।