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बेरोजगार की व्यथा

Ekal Study

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                            मै हूं बेरोजगार, बेरोजगार, बेरोजगार
        
                                                    
                            
मै हूं समाज पर भार अपनों पर भार खुद पर भार

इतिहास में बड़ी बड़ी घटनाएं दिखी
जैसे सब कुछ मेरे सम्मुख ही घटी,
हमने लंपट मूरख (जहांदर शाह) राजा देखा
अरु मोहन जोदड़ो की खुदाई करी

मैंने देखी चौसा की रार, पानीपत की रार, कलिंग की रार
मै हू बेरोजगार, बेरोजगार, बेरोजगार
मै हूं समाज पर भार अपनों पर भार खुद पर भार

भूगोल पड़ा है मैंने गोल गोल
गृह चक्र लगा रहे सूरज के चहु ओर
अरु पड़ी है मैंने ओजोन परत
मैंने पड़ा है समुद्र को ओर छोर

पड़ा है तारों का सार, झरनों का सार, सूरज का सार
मै हूं बेरोजगार, बेरोजगार , बेरोजगार
मै हूं समाज पर भार अपनों पर भार खुद पर भार

संविधान का प्रति भाग रटा
300 A बनने के लिए कब अनुच्छेद 31 हटा
मौलिक, अधिकार और कर्तव्य की बात छोड़ो
मैने प्रस्तावना तक 100 बार पड़ा

मैने पड़ी है राज्य सरकार, भारत सरकार , मिली जूली सरकार,

मै हूं बेरोजगार, बेरोजगार , बेरोजगार
मै हूं समाज पर भार अपनों पर भार खुद पर भार

गणित तो मानो पी ही लिया
ऐसा लगता कि सबकुछ सीख लिया
मैंने धराचार्य और हीरोंस रटा
खुद को सरलीकरण से घसीट लिया

सीखा है एक संख्या पर बार दो पर बार तीन पर बार
मै हूं बेरोजगार, बेरोजगार , बेरोजगार
मै हूं समाज पर भार अपनों पर भार खुद पर भार


रीजनिंग की गर बात करू,
मै पासा घन और घनाव रटू
कैलेंडर रटा ज्योतिषी से ज्यादा
2 क्षण में मां बेटे की उम्र बता दू
मैंने लाल को पीला धरती को आकाश
और कुत्ते को माना सियार,

मैं हूं बेरोजगार, बेरोजगार बेरोजगार
मैं हूं समाज पर भार, अपनों पर भार, खुद पर भार

हिंदी के सब छंद, चौपाई पड़ी
सर्वनाम, संज्ञा और क्रियाएं रटी
सब लिंग, वचन, कारक महीन पढ़ें
तीनों वाच्य सहित पांचों समास रटे

और पड़ा है शब्दालंकार अर्थालंकार उभयालंकार

मै हूं बेरोजगार, बेरोजगार , बेरोजगार
मै हूं समाज पर भार अपनों पर भार खुद पर भार....
एक वर्ष पहले
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